उत्तर प्रदेशलखीमपुर खीरी

धान खरीद से पहले लखीमपुर खीरी में बड़ा संकट! सहकारी समितियों ने दी बहिष्कार की चेतावनी

127 से घटकर 99 हुए सहकारी समितियों के क्रय केंद्र, केंद्रों की संख्या बढ़ाने की मांग; खाद्य विभाग पर उत्पीड़न और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

1 अक्टूबर से धान खरीद शुरू होने से पहले ही लखीमपुर खीरी में विवाद गहराता जा रहा है। सहकारी समितियों ने पर्याप्त धान खरीद केंद्र नहीं मिलने पर सरकार के लिए धान खरीद का बहिष्कार करने की चेतावनी दी है।

लखीमपुर खीरी में धान खरीद का नया सीजन शुरू होने से पहले ही सहकारी समितियों और खाद्य विभाग के बीच टकराव के हालात बनते दिखाई दे रहे हैं। जिले में 1 अक्टूबर से प्रस्तावित धान खरीद को लेकर सहकारी समितियों ने क्रय केंद्रों की संख्या घटाए जाने पर नाराजगी जताई है। सहकारी समन्वय समिति ने इस संबंध में जिला प्रशासन और शासन स्तर पर शिकायत भेजकर अपनी मांगें रखी हैं।
समिति के पदाधिकारियों का आरोप है कि पिछले कई वर्षों से लगातार सहकारी समितियों के धान खरीद केंद्र कम किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि इसका सीधा असर समितियों की आय, कर्मचारियों के रोजगार और किसानों को मिलने वाली स्थानीय स्तर की सुविधाओं पर पड़ रहा है।
समिति की ओर से जारी पत्र में वर्ष 2023 और वर्तमान स्थिति के आंकड़ों का हवाला दिया गया है। पत्र के मुताबिक वर्ष 2023 में सहकारी समितियों के 127 क्रय केंद्र थे, जबकि अब इनकी संख्या घटकर 99 रह गई है। समिति का कहना है कि केंद्रों की संख्या कम होने से धान खरीद से होने वाली आय और कमीशन प्रभावित हो रहा है।
सहकारी समितियां सिर्फ धान खरीद में ही भूमिका नहीं निभातीं, बल्कि किसानों को खाद वितरण समेत कई दूसरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराती हैं। समिति का कहना है कि क्रय केंद्रों की संख्या लगातार घटने से उनकी आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है और समितियों के कर्मचारियों के लिए भी मुश्किलें पैदा हो रही हैं।
सहकारी समन्वय समिति के संयोजक मनोज अग्रवाल ने खाद्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सहकारी समितियों के साथ लगातार उत्पीड़न किया जा रहा है और विभागीय स्तर पर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच होनी चाहिए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और खाद्य विभाग की ओर से इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।
मनोज अग्रवाल का कहना है कि अगर इस वर्ष सहकारी समितियों को पर्याप्त संख्या में धान खरीद केंद्र आवंटित नहीं किए गए तो समितियां सरकार के लिए धान खरीद करने से पीछे हट सकती हैं। उन्होंने सरकार से वर्ष 2023 में संचालित 127 क्रय केंद्रों को फिर से स्थापित करने की मांग की है।
सहकारी समितियों की इस चेतावनी ने धान खरीद शुरू होने से पहले प्रशासन के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ किसानों से धान खरीद की व्यवस्था को समय से तैयार करना है, वहीं दूसरी तरफ क्रय केंद्रों की संख्या को लेकर उठे विवाद का समाधान भी करना होगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शासन और प्रशासन सहकारी समितियों की मांग पर गंभीरता से विचार करेगा? क्या धान खरीद शुरू होने से पहले क्रय केंद्रों की संख्या को लेकर कोई समाधान निकलेगा? और अगर समितियां अपने रुख पर कायम रहती हैं तो इसका असर जिले में सरकारी धान खरीद व्यवस्था पर कितना पड़ेगा?
फिलहाल सहकारी समितियों ने अपनी मांगों के साथ सरकार के सामने साफ संदेश रख दिया है कि पर्याप्त क्रय केंद्र नहीं मिले तो इस वर्ष सरकारी धान खरीद से बहिष्कार किया जा सकता है। अब निगाहें शासन और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

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